61 के पार पहुंचा रुपया, RBI पर डॉलर बेचने का प्रेशर

tatpar 31 july 2013

नई दिल्ली।। रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है। बुधवार को एक डॉलर कीमत 61.17 रुपया हो गया। रुपए में यह रेकॉर्ड गिरावट है। इससे ज्यादा रुपया महज एक बार इसी साल 8 जुलाई को 61.21 तक गया था। रुपए की हालत के बाद रिजर्व बैंक पर डॉलर बेचने का दबाव है। मंगलवार को रुपया 60.48 पर बंद हुआ था। विदेशी समाचार एजेंसी रॉयटर के मुताबिक आरबीआई सरकारी बैंकों के माध्यम से डॉलर बेच सकता है।

मंगलवार को आरबीआई के ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। इसके साथ ही आरबीआई ने करंसी को मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम उठाने की भी पहल नहीं की थी। आईबीआई के इस रुख से डॉलर के मुकाबले रुपया और बुरी तरह से प्रभावित हुआ। मार्केट में रुपए को बेचने का प्रेशर बढ़ा जिसका असर बुधवार को कारोबार के दौरान दिखा। फॉरन इन्वेस्टमेंट के लिए सरकार की हर कोशिश नाकाम साबित हो रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानते हैं कि आरबीआई तब हरकत में आ रहा है जब रुपया बेहद कमजोर हो जा रहा है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने इकनॉमिक रिकवरी की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए प्राइवेट इकनॉमिस्ट्स की तर्ज पर ग्रोथ के अनुमान में कटौती की है। आरबीआई ने साफ कर दिया है कि अब ग्रोथ और इन्फ्लेशन से ज्यादा महत्वपूर्ण रुपए में स्टेबिलिटी है। इसने इस फाइनैंशल इयर के लिए ग्रोथ का अनुमान 5.7 फीसदी से घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया।

आरबीआई ने कमजोर इन्वेस्टमेंट साइकल को लेकर चिंता जताई है, जो कॉस्ट बढ़ने, ज्यादा कर्ज, कैश फ्लो घटने और एसेट क्वॉलिटी में गिरावट जैसे कारणों से रुका हुआ है। इसके साथ ही स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स बहुत धीमी गति से बढ़ रहे है। इनके चलते ग्रोथ घटने की आशंका बढ़ गई है।

और बढ़ेंगी महंगाई रुपए की कमजोरी से पेट्रोलियम की कीमत सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी पेट्रोलियम आयात करता है। ऐसे में आयात बिल बढ़ना लाजिमी है। जाहिर है सरकार ने पेट्रोल को डीकंट्रोल कर दिया है। अब तेल कंपनिया खुद मार्केट के हिसाब कीमतों में बदलाव करती हैं। पिछले महीने तेल कंपनियों मे तीन बार पेट्रोल की कीमतों में ईजाफा किया था। जब पेट्रोल की कीमत बढ़ती है तो इससे कई और प्रॉडक्ट की कीमतें प्रभावित होंगी।

विदेश में पढ़ाई मंहगी जिन्होंने विदेश में पढ़ाई करने के सपने संजो कर रखे हैं उनके लिए भी रुपया गिरना आफत है। जाहिर है डॉलर महंगा होगा तो विदेश में पढ़ाई के खर्च बढ़ जाएंगे। फीज से लेकर वहां रहने में होने वाले खर्चों का बजट बढ़ाना पड़ेगा।

आयातित वस्तुएं होंगी और महंगी गौरतलब है कि भारत का आयात के मुकाबले निर्यात बेहद कम है। ऐसे में डॉलर की कीमत बढ़ने और रुपए में गिरावट से आयातित वस्तुओं की कीमतों में ईजाफा होना तय है। विदेश से जो भी चीजें सरकार आयात करती है उसकी लागत बढ़ जाएगी। लागत बढ़ेगी तो बाजार में कीमत बढ़ेगी। ऐसे में इन्फ्लेशन बुरी तरह से प्रभावित होगा।

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