8 पूर्व सेना प्रमुख और 148 रिटायर्ड सैन्य अफसरों के नाम से राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी विवादों में

चिट्ठी में सशस्त्र बलों के जरिए सियासी फायदा उठाने, ‘मोदी जी की सेना’ जैसे शब्द बोलने और पायलट अभिनंदन की फोटो के इस्तेमाल पर ऐतराज जताया गयारिटायर्ड जनरल रॉड्रिग्स, एयर चीफ मार्शल सूरी और लेफ्टिनेंट जनरल नायडू ने कहा- ऐसी किसी भी चिट्ठी पर हमने दस्तखत नहीं किएमेजर जनरल हर्ष कक्कड़ ने कहा- हां, मैंने चिट्ठी पर अपना नाम लिखने की मंजूरी दी थीआर्मी वेटरंस का लिखा ऐसा कोई भी पत्र मिलने से राष्ट्रपति भवन का इनकार

नई दिल्ली. सेना के राजनीतिक इस्तेमाल पर पूर्व सैनिकों की चिट्ठी पर विवाद खड़ा हो गया है। तीन पूर्व सर्विस चीफ ने ऐसी किसी चिट्ठी की जानकारी से इनकार किया है। वहीं राष्ट्रपति भवन ने भी इस मुद्दे से जुड़ी चिट्ठी मिलने से इनकार किया है। हालांकि, मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ ने कहा है कि चिट्ठी में लिखी बातें जानने के बाद उन्होंने पत्र में नाम दिए जाने पर सहमति जताई थी।

दरअसल, ऐसी खबरें थीं कि आठ पूर्व सर्विस चीफ और 148 पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को इस मुद्दे पर पत्र लिखा। इसमें आर्मी चीफ (रिटायर्ड) जनरल एसएफ रोड्रिगेज, जनरल (रिटायर्ड) शंकर रॉय चौधरी, जनरल (रिटायर्ड) दीपक कपूर और एयरफोर्स के एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड) एनसी सूरी के हस्ताक्षर दर्शाए गए थे। इसके अलावा पत्र में तीन पूर्व नेवी चीफ एडमिरल (रिटायर्ड) एल रामदास, एडमिरल (रिटायर्ड) अरुण प्रकाश, एडमिरल (रिटायर्ड) मेहता और एडमिरल (रिटायर्ड) विष्णु भागवत के भी नाम हैं।

नहीं जानता कौन फैलाता है ऐसी फर्जी खबरें: पूर्व आर्मी चीफ

पूर्व आर्मी रोड्रिगेज ने ऐसे किसी भी पत्र पर हस्ताक्षर की बात को नकार दिया। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा- “मैं पूरा जीवन राजनीति से अलग रहा हूं। 42 साल तक अफसर रहने के बाद अब बदलना मुश्किल है। मैंने हमेशा भारत को पहले रखा। सेवा के दौरान सरकार ने हमें जो आदेश दिए हमने उनका पालन किया। हम सरकार के साधन हैं। कोई कुछ भी कह कर उसे फर्जी खबरों की तरह फैला सकता है। मैं नहीं जानता यह लोग कौन हैं जो इस तरह की फर्जी खबरें फैलाते हैं।” 

उधर पूर्व एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने कहा, “मैंने लिखा है कि सेनाएं सियासत से नहीं जुड़ी होतीं और चुनी हुई सरकार का समर्थन करती हैं। लेकिन ऐसे किसी पत्र के लिए मेरा सहमति नहीं ली गई। पत्र में जो भी लिखा है मैं उससे बिल्कुल सहमत नहीं हूं। हमारे बयानों को गलत तरीके से पेश किया गया। यह एडमिरल रामदास का पत्र नहीं है। इसे किसी मेजर चौधरी ने लिखा है और यह वॉट्सऐप और ईमेल पर वायरल हो रहा है।”

पूर्व सैनिकों के पत्र में क्या?

इस पत्र में पूर्व सैनिकों ने नेताओं द्वारा मिलिट्री ऑपरेशन और क्रॉस बॉर्डर स्ट्राइक का श्रेय लिए जाने पर नाराजगी जताई। साथ ही आर्म्ड फोर्सेज को ‘मोदीजी की सेना’ बुलाने और पोस्टरों में पाक का एफ-16 मार गिराने वाले पायलट अभिनंदन की तस्वीर के इस्तेमाल को भी अस्वीकार्य बताया गया है। पत्र में कहा गया है कि इस राजनीतिक एजेंडे के लिए सेना का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक रैली में सेना को मोदी की सेना बताया था। इस पर चुनाव आयोग ने भी ऐतराज जताया था।