87% बच्चे बहुत ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं मोबाइल, टीवी जैसे स्क्रीन वाले गैजेट्स, आंखों पर पड़ रहा है असर

क अध्ययन के अनुसार, आज बच्चे टीवी देखने या कंप्यूटर और मोबाइल उपकरणों का उपयोग करने में बहुत अधिक समय खर्च कर रहे हैं। ऐसा उन बच्चों में ज्यादा है, जो प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा स्क्रीन से चिपकी रहती थीं।   जर्नल जेएनए बाल रोग में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 12 महीने की उम्र के बच्चे औसतन रोज 53 मिनट स्क्रीन पर खर्च कर रहे हैं, वहीं 3 साल की उम्र और इससे ज्यादा के बच्चे लगभग 150 मिनट से अधिक फोन और  कंप्यूटर के इस्तेमाल पर खर्च कर रहे हैं। अध्ययन के अनुसार इस तरह इन बच्चों में आगे चलकर कुछ बड़ी बीमारियों के शिकार होने की संभावनाएं ज्यादा है। आइए जानते हैं इस अध्ययन के बारे में।

अध्ययन किस बारे में बात कर रहा है?

शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि 8 वर्ष की आयु तक, बच्चों द्वारा किसी न किसी प्रकार के स्क्रीन पर समय बीताने की सबसे अधिक डाटा पाए गए हैं, जो इस बात का संकेत करते हैं कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संकट में है।

अध्ययन में अमेरिका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की वरिष्ठ लेखिका एडविना येंग ने कहा, “हमारे नतीजे बताते हैं कि स्क्रीन की आदतें जल्दी शुरू होती हैं।” अल्बनी और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी लैंगोन मेडिकल सेंटर के विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने, अपस्टैट किड्स स्टडी के आंकड़ों का विश्लेषण किया है, जो मूल रूप से बांझपन के उपचार के बाद विकसित बच्चों के विकास के क्रम की जांच करना था।

अनुसंधान में कदम

अध्ययन में हिस्सा लेने वाले लगभग 4,000 बच्चों की माताओं ने 12, 18, 24, 30 और 36 महीने की उम्र में अपने बच्चों की मीडिया की आदतों पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए। उन्होंने इसी तरह के सवालों का जवाब दिया, जब बच्चे 7 और 8 साल के थे। अध्ययन ने जन्म के रिकॉर्ड और अन्य सर्वेक्षणों से माताओं और बच्चों पर अतिरिक्त जनसांख्यिकीय जानकारी संकलित की। वहीं इस शोध में अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने 18 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए डिजिटल मीडिया एक्सपोजर से बचने की सिफारिश की। जहां ये संस्था बताती है कि 18 से 24 महीने के बच्चों को धीरे-धीरे स्क्रीन मीडिया की आदट ज्यादा जल्दी लग रही है, वहीं 2 से 5 साल की उम्र के बच्चों के लिए दिन में एक घंटे स्क्रीन पर खेलने के समय को कम करने की कोशिश करनी होगी।

वर्तमान अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि कुल मिलाकर 87 प्रतिशत बच्चें ऐसे हैं, जिनमें ये स्क्रीन का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। हालांकि, जबकि स्क्रीनिंग समय 7 और 8 साल की उम्र तक के बच्चों में प्रति दिन 1.5 घंटे से कम है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह कमी स्कूल से संबंधित गतिविधियों के समय से संबंधित है। शोधकर्ताओं ने बच्चों को दो समूहों में वर्गीकृत किया जो इस बात पर आधारित था कि उनकी औसत दैनिक स्क्रीन का समय 1 वर्ष से 3 वर्ष की आयु तक बढ़ गया है

पहला समूह, जिसमें 73 प्रतिशत बच्चे औसतन 51 मिनट एक दिन का स्क्रीन पर बिताते थे। वहीं दूसरे समूह, जिसमें 27 प्रतिशत बच्चे दिन में लगभग 4 घंटे स्क्रीन पर खर्च करते हैं। वहीं माता-पिता की शिक्षा के उच्च स्तर दूसरे समूह में शामिल किए जाने की कम बाधाओं से जुड़े थे। यानी जिन बच्चों के मां-बाप जितने ज्यादा पढ़े-लिखे थे उतना ही उनके बच्चे स्क्रीन डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे थे। वहीं कम पढ़े-लिखे मां-बाप के बच्चे इसका इस्तेमाल कम कर रहे थे। वहीं शोधकर्ताओं की मानें, तो लड़कों की तुलना में लड़कियों में स्क्रीन पर बिताने का समय कम था। वहीं इस तरह इन बच्चों को देखते हुए शोधकर्ताओं का कहना है कि मां-बार ज्यादा से ज्यादा अपने बच्चों को स्क्रीन से दूर रखें।

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