AGR पर SC का आदेशः कोई मुद्दा सामने आने पर होगी आंतरिक चर्चाः आरबीआई गवर्नर दास

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शनिवार को कहा कि AGR की बकाया राशि को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से जुड़ा कोई मुद्दा सामने आता है तो उस पर आंतरिक तौर पर चर्चा की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को Bharti Airtel, Vodafone Idea और अन्य टेलीकॉम कंपनियों को 1.47 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान नहीं करने पर अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी थी। दास ने इस आदेश को लेकर कोई खास बात नहीं की।

इस आदेश का बैंकों पर असर देखने को मिल सकता है, जिन्होंने वित्तीय दबाव का सामना कर रही टेलीकॉम कंपनियों को कर्ज दिया हुआ है। इस बारे में पूछे जाने पर दास ने कहा अगर कोई मुद्दा सामने आता है तो उस पर आंतरिक तौर पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

State Bank of India (SBI) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि यह टेलीकॉम कंपनियों पर निर्भर है कि वे पैसे की व्यवस्था कहां से करती हैं। उन्होंने समायोजित सकल राजस्व (AGR) बकाया को लेकर उच्चतम न्यायालय के आदेश के कुछ देर बाद ही यह बात कही। 

इसी बीच आरबीआई बोर्ड की बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए दास ने कहा कि आने वाले महीनों में लोन वितरण के गति पकड़ने की संभावना है। बोर्ड को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी संबोधित किया। बजट पर चर्चा को लेकर आयोजित इस बैठक में सीतारमण ने कहा कि वित्त मंत्रालय कृषि क्षेत्र के लिए क्रेडिट फ्लो को लेकर बैंकों की निगरानी कर रहा है। 

मोबाइल टैरिफ में फिर हो सकती है इतनी वृद्धि, AGR पर SC के फैसले का असर

Vodafone Idea के अस्तित्व पर सवाल

शीर्ष अदालत ने एजीआर को लेकर 24 अक्टूबर, 2019 को फैसला दिया था। इस निर्णय में उसने टेलीकॉम कंपनियों को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का  भुगतान करने को कहा था। एजीआर के रूप में टेलीकॉम कंपनियों को सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपये करोड़ रुपये का भुगतान करना है। अकेले Vodafone Idea Ltd (VIL) को 53,038 करोड़ रुपये देना है। सुप्रीम कोर्ट ने बकाया एजीआर के भुगतान में देरी को लेकर शुक्रवार को नाराजगी जाहिर की थी। भारती एयरटेल पर 35,586 करोड़ रुपये की देनदारी है। दूरसंचार विभाग ने इसके बाद दूरसंचार कंपनियों को बकाया एजीआर के भुगतान के लिए शुक्रवार के रात 11:59 बजे तक की समयसीमा तय की थी।

मोबाइल टैरिफ में 10-25% तक की वृद्धि संभव

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद Vodafone Idea का भारत के टेलीकॉम बिजनेस में बना रहना मुश्किल हो गया है। इस बारे में बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में संभव है कि भारत के टेलीकॉम मार्केट में दो ही निजी कंपनियों का दबदबा रहे और ऐसी परिस्थितियों में मोबाइल टैरिफ में भारी बढ़ोत्तरी हो सकती है। बाजार पर नजर रखने वालों का कहना है कि इस तरह की परिस्थितियों में आने वाले दिनों में मोबाइल टैरिफ में 10-25 फीसद तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में मोबाइल टैरिफ आपके पॉकेट का बोझ और बढ़ा सकता है।

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