BJP से लेकर UP तक क्या हैं इस राष्ट्रपति चुनाव के मायने, 5 प्वाइंट्स

नई दिल्ली. देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा? इसका फैसला आज हो जाएगा। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के रामनाथ कोविंद और यूपीए की मीरा कुमार आमने-सामने हैं। जीत-हार किसी की भी हो, लेकिन दलित वर्ग, एनडीए, यूपीए और उत्तर प्रदेश के लिए ये चुनाव किसी ना किसी तरह से मायने रखता है। बता दें कि प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। नए राष्ट्रपति 25 जुलाई को पद संभालेंगे। उसी दिन प्रणब का फेयरवेल संसद के सेंट्रल हॉल में हाेगा।
क्यों मायने रखता है इस बार का राष्ट्रपति चुनाव?
1) दलित
– इस बार दोनों कैंडिडेट मीरा कुमार और काेविंद, दलित हैं। दोनों में से कोई भी जीते, केआर नारायणन के बाद दूसरा दलित राष्ट्रपति मिलना तय है। नारायणन 25 जुलाई 1997 को 10वें प्रेसिडेंट बने थे, राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें 95% वोट हासिल हुए थे। चुनाव में उनके खिलाफ पूर्व चीफ इलेक्शन कमिश्नर टीएन सेशन थे।
2) एनडीए
– अगर कोविंद जीत जाते हैं तो एपीजे अब्दुल कलाम के बाद दूसरी बार एनडीए की पसंद का राष्ट्रपति मिलेगा। कलाम 11वें राष्ट्रपति थे और वे 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक इस पद पर रहे। एनडीए ने जब कलाम को राष्ट्रपति चुनाव में अपना कैंडिडेट घोषित किया, तब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने उन्हें सपोर्ट किया था।
– लोकसभा में बीजेपी बहुमत में है। 17 राज्यों में बीजेपी सरकार है। और अब राष्ट्रपति भी होगा तो ये बड़े फैसले संभव होंगे।
– हो सकता है कि सरकार भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक फिर लाए। तीन बार ऑर्डिनेंस लाने के बाद इसे ड्रॉप करना पड़ा था।
– लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए जरूरी कदम अब तेजी से उठाए जा सकते हैं।
– चुनावों की स्टेट फंडिंग पर बहस लंबे समय से चल रही है। पार्टी और सरकार इसे अमल में लाने के लिए नया कानून ला सकती है।
3) यूपीए
– अगर मीरा कुमार जीत जाती हैं तो यूपीए को प्रतिभा पाटिल के बाद दूसरी महिला राष्ट्रपति बनवाने का क्रेडिट जाएगा। राजस्थान की गवर्नर रहीं प्रतिभा पाटिल को यूपीए ने 2007 में अपना कैंडिडेट बनाया था। इस राष्ट्रपति चुनाव में तत्कालीन उप-राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत इंडिपेंडेंट कैंडिडेट थे, उन्हें अनऑफिशियली एनडीए का सपोर्ट मिला था। चुनाव जीतने के बाद प्रतिभा पहली महिला राष्ट्रपति बनीं थीं।
4) यूपी
– कोविंद के जीतने की स्थिति में 9 प्रधानमंत्री देने वाले यूपी से देश को पहला प्रेसिडेंट मिलेगा। हालांकि, मीरा कुमार का भी यूपी से कनेक्शन है। 1985 में जब उन्होंने यूपी के बिजनौर से ही पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा था तो मायावती और रामविलास पासवान जैसे मजबूत दलित नेताओं को हराया था।
– इससे पहले लखनऊ में जन्मे मोहम्मद हिदायतुल्लाह 20 जुलाई 1969 से 24 अगस्त 1969 तक एक्टिंग प्रेसिडेंट रहे। इसके बाद हिदायतुल्लाह 1979 से 1984 के बीच वाइस प्रेसिडेंट बने। 1982 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह ट्रीटमेंट के लिए अमेरिका गए, तब वाइस प्रेसिडेंट हिदायतुल्लाह ने 6 अक्टूबर 1982 से 31 अक्टूबर 1982 तक प्रेसिडेंट पोस्ट संभाली। इस तरह से वे दो बार एक्टिंग प्रेसिडेंट रहे।
5) बीजेपी
– कोविंद जीते तो 37 साल में पहली बार राष्ट्रपति पद पर ऐसा नेता रहेगा जो बीजेपी से जुड़ा रहा है। कलाम एनडीए की पसंद के राष्ट्रपति बने थे, लेकिन वे भाजपा के नहीं थे। भैरोंसिंह शेखावत बीजेपी के थे जो उपराष्ट्रपति थे।
– 6 अप्रैल 1980 को पार्टी बनी थी। 1990 में पहली सरकार राजस्थान में बनाई। 1996 में देश में बीजेपी की पहली सरकार बनी, उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी पीएम बने थे।
– 2014 में बीजेपी ने पहली पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। आज 13 राज्यों में बीजेपी और 4 राज्यों (जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, आंध्र, नागालैंड) में उसके गठबंधन की सरकार है।
रामनाथ कोविंद v/s मीरा कुमार
रामनाथ कोविंद:यूपी में जन्मे, बिहार के गवर्नर रहे। सादगीभरी छवि, कानून के जानकार, संविधान की समझ, दलित चेहरा। दो चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
मीरा कुमार:बिहार में जन्मीं मीरा साफ-सुथरी छवि, कानून की जानकार, संविधान की जानकारी (लोकसभा स्पीकर रहीं)। विदेश नीति की जानकारी (इंडियन फॉरेन सर्विस में रहीं)। दलित चेहरा और पूर्व डिप्टी पीएम जगजीवन राम की बेटी। रामविलास पासवान और मायावती जैसे बड़े दलित लीडर्स को चुनाव में हरा चुकी हैं। करोलबाग से 3 बार MP भी रहीं।

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