G20: पहली बार कूटनीति की पिच पर एक साथ उतरेंगे पीएम मोदी और नए विदेश मंत्री एस जयशंकर

ओसका, जापान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल का एक महीना पूरा करने से पहले जिस मंच पर होंगे वह जी-20 का होगा. जी-20 यानी ग्रुप ऑफ 20. यह दुनिया की 20 बड़ी और तेज रफ्तार अर्थव्यवस्थाओं व आर्थिक संगठनों का कुनबा है. इसमें अमेरिका, चीन, भारत, रूस, फ्रांस समेत कई मुल्कों के अलावा शामिल हैं. दुनिया की दो-तिहाई आबादी और 80 फीसद से ज़्यादा कारोबार इस समूह के खाते में है.

जी-20 के मंच पर टीम मोदी का डी-20
जून 28-29 को हो रहे 14वें जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओसाका जापान पहुंचेंगे. यह छठा अवसर होगा जब पीएम मोदी इस बैठक में शरीक होंगे. भारत अब तक सभी जी-20 शिखर सम्मेलनों में शिरकत करता आया है वहीं 2022 में वो इसकी मेजबानी भी करेगा. जी20 के लिए पीएम मोदी और उनकी आला कूटनीतिक टीम 27 जून की सुबह जापान पहुँच जाएगी. साथ ही जी20 के बहाने जुट रहे विश्व नेताओं के साथ इस टीम के सघन और सक्रिय सम्पर्क की भी पूरी तैयारी हो गई है.

जून 27 की शाम ओसाका में भारतीय मूल के लोगों के साथ सामुदायिक संवाद से लेकर अनेक नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातों और बहुपक्षीय बैठकों समेत पीएम मोदी जापान में करीब 20 कूटनीतिक आयोजनों का हिस्सा बनेंगे. साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर जहां कई मौकों पर पीएम मोदी व साथ होंगे वहीं जी20 में शरीक होने आए दूसरे मुल्कों के विदेश मंत्रियों से भी बात करेंगे. इसके अलावा जी20 बैठक के लिए शेरपा बनाए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु पहले हर ओपनिंग बल्लेबाज़ के तौर पर जापान में हैं. महज़ तीन दिनों के जापान दौरे में पीएम मोदी और उनकी टीम डिप्लोमेसी का डी20 खेलती नज़र आएगी.

कूटनीति की पिच पर मोदी-जयशंकर की जोड़ी
कूटनीति की पिच पर पीएम मोदी ही नहीं दूसरे छोर से विदेश मंत्री जयशंकर भी बल्लेबाज़ी करते नगर आएंगे. बीते पांच सालों में यह पहला मौका होगा जब पीएम और विदेश मंत्री एक साथ किसी बहुपक्षीय बैठक में शरीक होंगे. इसके अलावा पूर्व वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु जी20 बैठक के शेरपा के तौर पर पहली ही जापान पहुंच चुके हैं.
जी20 के हाशिए पर पीएम मोदी एक दर्जन से ज़्यादा द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुलाकातें करेंगे. ओसाका में पीएम मोदी की मुलाकात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुअल मेक्रोन, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे, तुर्की के राष्ट्रपति एर्डोगन, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान समेत कई नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे.

जी20 के हाशिए पर ही पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारत-रूस-चीन के त्रिपक्षीय समूह RIC की बैठक करेंगे. सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने ओसका में इस बैठक के आयोजन की पहल की. इसके अलावा पीएम मोदी जापान-अमरीका-भारत के त्रिपक्षीय समूह JAI की बैठक में भी शामिल होंगे. जी20 शिखर सम्मेलन के तहत होने वाले विभिन्न आयोजनों का भी पीएम मोदी हिस्सा होंगे.

मोदी ट्रम्प मुलाकात
जी20 के हाशिए पर होने वाली पीएम मोदी की द्विपक्षीय मुलाकातों में अहम होगी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से उनकी बातचीत. भारत की सत्ता में पीएम मोदी की वापसी के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात होगी. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 28 जून की सुबह जी-20 सम्मेलन स्थल पर ही दोनों नेता अलग से मिलेंगे. हालांकि इससे पहले नरेंद्र मोदी के चुनाव जीतने पर राष्ट्रपति ट्रम्प उन्हें फोनकर बधाई दे चुके हैं.

मोदी और ट्रम्प की यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका की कारोबार नीतियों को लेकर भारत समेत दुनिया के कई मुल्कों के साथ उसके मतभेद उभरे हैं. बीते कुछ महीनों के दौरान दोनों मुल्कों ने एक दूसरे के कारोबार पर सख्ती करते हुए अतिरिक्त शुल्क लगाए है. वहीं रूस से हुए S400 मिसाइल सौदे से लेकर ईरान से तेल खरीद के मुद्दे पर अमेरिका भारत पर आगे न बढ़ने का दबाव बनाए हुए है. हालांकि उम्मीद है कि मोदी ट्रम्प मुलाकात से पहले नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो की भारतीय विदेश मंत्री से वार्ता और पीएम मोदी से मुलाकात सहमति बनाने के ने रास्ते तलाश सकेगी.

क्या है जी20?
जी-20 का गठन 1990 में आर्थिक मंदी के झटके के बाद किया गया. गरज थी कि दुनिया के देश आर्थिक मोर्चे पर साझेदारी कर सकें ताकि मंदी की मार से बचा जा सके. साथ ही दुनिया के आर्थिक प्रबंधन में उन मुल्कों को भी हिस्सेदारी हासिल हो जिनकी कोई समुचित नुमाइंदगी नहीं है. इस कवायद में पहली बार दिसंबर 1999 में जी-20 मुल्कों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर बर्लिन, जर्मनी में मिले. भारत ने भी 2002 में जी-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के सम्मेलन की मेजबानी की. इस संगठन के बढ़ते प्रभाव और अहमियत के मद्देनजर 2008 में इसकी बैठकों को शिखर सम्मेलन स्तर का बना दिया गया. यानी साल में एक बार जी-20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासन प्रमुख शिखर बैठक के लिए मिलने लगे.

इस बार जी20 में होगा क्या खास?
जापान पहली बार जी20 शिखर बैठक की मेजबानी कर रहा है. ओसाका शहर में हो रहे सम्मेलन में इस बार का विषय ‘मानव केंद्रित भावी समाज’ है. वार्ताओं के लिए तीन आधार स्तंभ तय किए गए हैं- 1, आयु परिवर्तन की चुनौती से मुकाबले की तैयारी, 2. श्रम बाजार में लिंग अनुपात को ठीक रखान, 3. नए कामकाज के संदर्भ में राष्ट्रीय नीतियों व बेस्ट प्रैक्टिसेज का आदान-प्रदान.

सम्मेलन इस बार जिन मुद्दों के इर्दगिर्द सिमटा होगा वो हैं-
1. वैश्विक अर्थव्यवस्था,
2. कारोबार व निवेश,
3. नवोन्मेष यानी इनोवेशन
4. पर्यावरण व ऊर्जा
5. रोजगार
6. महिला सशक्तिकरण
7. विकास
8. स्वास्थ्य

शिखर सम्मेलन में जिन मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा होगी उनमें मुक्त व्यापार, आर्थिक विकास, वैश्विक अर्थव्यवस्था जिसमें वित्त व कर संबंधी मामले शामिल हैं, डिजिटल इकोनॉमी, आर्टिफिशल इंटेलीजेंस, समावेशी और सतत विकास वाली दुनिया, ऊर्जा एवं पर्यावरण, सोसाइटी 5.0, बेहतर गुणवत्ता का ढांचागत विकास, वैश्विक स्वास्थ्य, आयु वृद्धि, जलवायु परिवर्तन तथा समुद्र में बढ़ती प्लास्टिक की समस्या.

क्या होंगी भारत की प्राथमिकताएं?
जी20 के मंच पर भारत जिन मुद्दों पर जोर देगा उनमें शामिल है- ऊर्जा सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता, आपदा रोधी ढांचागत निर्माण, बहुपक्षीय और डब्ल्यूटीओ सुधार, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, आर्थिक अपराधियों की धरपकड़ पर सहयोग, खाद्यान्न सुरक्षा, तकनीक का लोकतांत्रीकरण तथा पोर्टेबल सोशल सिक्योरिटी स्कीम. भारत का प्रयास इंटरनेशनल सोलर अलायंस का दायरा बढ़ाने और मिश्रित ऊर्जा उपयोग को लेकर अपनी योजनाओं को शोकेस करने का होगा. भारत ने अगले कुछ सालों में 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा और 70 हजार मेगावाट पवन उर्जा इस्तेमाल का लक्ष्य रखा है.

भारत का जोर इस बात पर भी होगा कि विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ समेत कारोबार प्रबंधन से जुड़ी वैश्विक संस्थाओं में ज़रूरी सुधार किए जाएं. बीते कुछ में अमेरिका समेत कई विकसित मुल्कों में राष्ट्रीय संरक्षणवाद बढ़ है जिसके चलते डब्ल्यूटीओ नियमों को ताख पर रखकर शुल्क लगाने का चलन बढ़ा है. इसके अलावा आतंकवाद की वित्तीय रसद बंद करने और दुनिया में आर्थिक अपराधियों के खिलाफ़ कार्रवाई में सहयोग का मुद्दा भी भारत के एजेंडे में अहम होगा.

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