JNU की घटना के बाद RSS की योजना, पाठ्यक्रम में शामिल कराएंगे राष्ट्रवाद के प्रसंग

नागौर(राजस्थान).जेएनयू में हुई घटनाओं के बाद अब आरएसएस ने नौजवानों को ज्यादा संख्या में राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने के लिए अब सरकारी पाठ्यक्रमों में देश के इतिहास में रहे राष्ट्रवाद के किस्से और प्रसंगों को शामिल करने की तैयारी में जुट गया है। नागौर में चल रही राष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा की बैठकों में इस विषय पर विचार किया जा रहा है। हालांकि संघ लगातार इस बात का समर्थन करता रहा है कि पाठ्यक्रमों में ज्यादा से ज्यादा राष्ट्रवाद से जुड़े प्रसंगों को शामिल किया जाए। इसी नीति को अब आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रतिनिधि सभा में विचारधारा से जुड़े शैक्षणिक विशेषज्ञ पर लगातार चर्चा कर रणनीति बनाकर इसे आगे बढ़ाया जाएगा।
महापुरुषों के जीवन, उनके योगदान व संघर्ष पर देंगे जोर
संघ का मानना है कि पाठ्यक्रमों में देश के महापुरुषों के जीवन, देश को बचाने में उनके योगदान, स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और वर्तमान में सैनिकों के बलिदान से जुड़ी घटनाओं को शामिल किया जाना चाहिए। इस संबंध में संघ के शैक्षणिक कार्यों से जुड़े विद्वानों और संघ की शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारियों से चर्चा हो चुकी है। अब इस विषय को लेकर प्रतिनिधि सभा को किसी एक सत्र में विश्लेषण के बाद इस संबंध में अपनी राय जाहिर की जाएगी। पता चला है कि इस संबंध में संघ केंद्र और राज्य सरकार से भी आग्रह करेगा।
जेएनयू मामले की कार्यकारी मंडल की बैठक में निंदा
संघ जेएनयू जैसी शिक्षा की महत्वपूर्ण संस्था में राष्ट्रविरोधी नारे लगने को काफी गंभीरता से ले रहा है। प्रतिनिधि सभा की कार्यकारी मंडल की बैठक में इस प्रकरण की निंदा भी की गई और इस पर अफसोस भी जताया गया कि आज की युवा पीढ़ी में देश भक्ति की भावना का ह्रास हो रहा है। आरएसएस शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में देशभक्ति और राष्ट्रवाद को शामिल किए जाने पर पहले से ही पक्षधर रहा है, लेकिन जेएनयू की घटना के बाद संघ इस पर ज्यादा गौर करना शुरू कर दिया है।
शक्ति- लोगों को सताने के लिए नहीं, बल्कि समाज का निर्माण करें
 स्वयं सेवकों से आह्वान किया कि अपनी शक्ति को समाज की सेवा के लिए लगाएं। यह शक्ति विद्या, धन और शारीरिक तीनों तरह की हो सकती है। जो गलत होते हैं, वे विद्या का अहंकार, धन का रौब और शारीरिक शक्ति काे लोगों को सताने के रूप में काम में लेते हैं, जो अनुचित है।विष पान करो या शस्त्र का इस्तेमाल करो, नुकसान ही है, लेकिन इससे अधिक नुकसान गलत विचारों से होता है। इसलिए शील व्यवहार हो और भाषा ठीक रखें। हमारे अंदर जो गुण है, उनसे अच्छे समाज का निर्माण
करें।
विशेषता- संघ ऐसा संगठन, जिससे जुड़ते ही लक्ष्य समझ आ जाता है
 स्वांत रंजन ने शुरुआत संघ की ताकत से की। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवक बनते ही दो चीज खुद मिल जाती हैं। पहला जीवन का लक्ष्य मिलता है। दूसरा हमें कहां जाना है यह भी तय हो जाता है। अब हमें यह करना है कि संपूर्ण हिंदू संगठित हों और सबको संस्कारित करें। हमें यह भी जानना है कि साध्य, साधन और साधक को अपनाना है। क्योंकि इसमें क्या करना है और कहां जाना है और लक्ष्य क्या है छिपा है। संघ एक ऐसी ताकत है जिसमें खेल खेल में स्वयंसेवक तैयार होते हैं। इसके अलावा ऐसी पद्वति नहीं हैं।
 संघर्ष – नदी के प्रवाह में बहकर सुडौल बनना है, न की कमजोर
 स्वांत रंजन ने कहा कि चट्टान से निकलने वाले पत्थर नदी के प्रवाह के साथ बहकर ही सालिगराम की सूरत में आते हैं। चट्टानों के टुकड़े नदी के प्रवाह के बाहर चले गए हैं तो अनगढ़े बेडौल पड़े रहेंगे। कोई टुकड़े अगर तलहटी में रह गए तो सालिगराम नहीं बन सकेंगे और जो अकेले बहने वाले हैं, वे भी बेडौल ही रहेंगे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ऐसी ही नारायणी नदी है, जिसके प्रवाह में बहकर बेडौल पत्थर सालिगराम बन जाते हैं। संघ के कार्यक्रम में मिलने वाले बौद्धिक की रगड़ से अनेक गुणों का निर्माण होता है।
 संदेश – भाग्य से नहीं आगे चलकर कदम बढ़ाने से मिलता है लक्ष्य
हनुमान जी के गुणों धृती, दृष्टि, मति और दक्षता के गुणों को आत्मसात करें। इससे आगे बढ़ने का रास्ता मिल जाएगा। जो बैठे रहते हैं, सोए रहते है उनके भाग्य आगे नहीं बढ़ते, लेकिन जो लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाता है, वह चल पड़ता है और लक्ष्य को हासिल कर लेता है। यह भी समझाया कि संघ की शाखा नारायणी नदी के प्रवाह के समान है। प्रवाह के साथ आगे बढ़ने से ही लक्ष्य की प्राप्ति संभव हैं। नए स्वयंसेवक इसी प्रक्रिया से गुणों का निर्माण कर पाते है। जरूरी है कि लगातार अभ्यास किया जाए।
चप्पे चप्पे पर पुलिस का पहरा, स्वयंसेवकों ने भी संभाली व्यवस्था
 – शारदाबाल निकेतन जाने वाले मुख्य रास्तों पर पुलिस का सख्त पहरा था। जगह-जगह चैकिंग पाइंट बनाकर वाहनों के अलावा लोगों की भी जांच की जा रही थी। सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में जाब्ता लगा था।
 – शहर के काफी लोगों की आयोजन स्थल पर जाने की इच्छा थी, लेकिन नियमों की वजह से जा नहीं पाए। इसलिए काफी लोग ऐसे थे, जिन्होंने स्कूल के आसपास बनी इमारतों पर चढ़कर आयोजन में हुए संबोधन को सुना।
 – आरएसएस के स्वयंसेवकों ने प्रबंधन खुद ही संभाल रखा था। इसमें पेयजल और मोबाइल सुरक्षित रखने और भी कई व्यवस्थाएं शामिल हैं। यह भी ध्यान रखा कि आने वाले स्वयंसेवकों को परेशानी नहीं हो।
 भाजपा के रामलाल और वी सतीश पहुंचे, कल आएंगे शाह- पांच राज्यों में होने वाले चुनाव पर होगी चर्चा
 राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठकों में भाजपा की भी भागीदारी रहेगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के गुरुवार की शाम तक यहां आने की संभावना है। उनके साथ मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी नागौर आ सकती हैं। इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री वी. सतीश मंगलवार की शाम को पहुंच गए। वे यहां संघ के विभिन्न सत्रों में भाग लेंगे और इस दौरान भाजपा की स्थिति के साथ आने वाले पांच राज्यों के चुनाव को लेकर भी चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि इन चुनावों में संघ की भूमिका क्या हो सकती है, इसे भी तय किया जाएगा।