OROP: पूर्व सैनिकों का प्रदर्शन शुरू, पीएम-प्रेसिडेंट को देंगे खून से लिखी चिट्ठी

नई दिल्ली. वन रैंक वन पेंशन’ को लागू किए जाने की मांग को लेकर पूर्व सैनिकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के 50 जगहों पर रविवार को अपना प्रदर्शन शुरू किया। पूर्व सैनिक राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें अपने मेडल वापस किए जाने की पेशकश करेंगे। साथ ही वे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अपने खून के दस्तखत वाली चिट्ठी भी सौंपेंगे। देशभर में इस प्रदर्शन का आयोजन इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट(IESM) की तरफ से किया गया है।

सोमवार से भूख हड़ताल

वन रैंक वन पेंशन की मांग कर रहे ये पूर्व सैनिक अपनी मांगे न माने जाने पर सोमवार से अनिश्चिकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठेंगे। अपनी मांगों लेकर पिछले 10 दिनों के दौरान ये पूर्व सैनिक सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग, रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर और वित्तमंत्री अरुण जेटली से मुलाकात कर चुके हैं। अभी तक इस मुद्दे का कोई हल नहीं निकला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसे एक जटिल मुद्दा बताते हुए पूर्व सैनिकों से धैर्य रखने और उनकी सरकार में ही इस मुद्दे को सुलझा लिए जाने की बात कह चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक देशभर में करीब 25 लाख पूर्व सैनिक हैं। उनकी मांग है कि योजना को लागू किए जाने के संबंध में केंद्र सरकार एक निश्चित तारीख की घोषणा करे। गौरतलब है कि यह मुद्दा बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में भी शामिल था।

कितने पूर्व सैन्यकर्मियों को मिलेगा फायदा, पेंशन कैसे होगी लागू?

देश में 25 लाख से ज्यादा रिटायर्ड सैन्यकर्मी हैं। उदाहरण के लिए योजना इस तरह बनाई गई है कि जो अफसर कम से कम 7 साल कर्नल की रैंक पर रहे हों उन्हें समान रूप से पेंशन मिलेगी। ऐसे अफसरों की पेंशन 10 साल तक कर्नल रहे अफसरों से कम नहीं होगी, बल्कि उनके बराबर होगी।

क्यों उठी थी मांग?

– रिटायर्ड सैन्यकर्मी लंबे समय से वन रैंक-वन पेंशन की मांग कर रहे हैं। वन रैंक-वन पेंशन की मांग को लेकर कई पूर्व सैन्यकर्मियों ने अपने पदक लौटा दिए थे। इसकी पहली वजह यह है कि अभी सैन्यकर्मियों को एक ही रैंक पर रिटायरमेंट के बाद उनकी सेवा के कुल वर्षों के हिसाब से अलग-अलग पेंशन मिलती है।

– छठां वेतन आयोग लागू होने के बाद 1996 से पहले रिटायर हुए सैनिक की पेंशन 1996 के बाद रिटायर हुए सैनिक से 82% कम हो गई। इसी तरह 2006 से पहले रिटायर हुए मेजर की पेंशन उनके बाद रिटायर हुए अफसर से 53% कम हो गई्र।

– मांग उठने की दूसरी वजह यह भी है कि चूंकि सैन्यकर्मी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में जल्दी रिटायर हो जाते हैं, इसलिए उनके लिए पेंशन स्कीम अलग रखी जाए।

– केंद्र के नौकरशाह औसतन 33 साल तक सेवाएं देते हैं और अपनी आखिरी तनख्वाह की 50% पेंशन पाते हैं। आर्मी में सैनिक आमतौर पर 10 से 12 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं और सैलरी की 50% से कम पेंशन पाते हैं।