PAK यूनिवर्सिटी अटैक: बच्चों को स्कूल भेजने से डरे लोग, मांगी सिक्युरिटी की गारंटी

पेशावर. चरसद्दा की बाचा खान यूनिवर्सिटी में बुधवार को हुए अटैक के चलते लोग दहशत में हैं। वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते। उनका कहना है कि उन्हे बच्चों की सिक्युरिटी की गारंटी चाहिए।
हमले के बाद क्या कह रहे हैं लोग…
– दिसंबर 2014 में पेशावर के एक स्कूल में आतंकी हमले में 132 बच्चों समेत 145 लोग मारे गए थे।
– लोगों का मानना है कि बाचा खान यूनिवर्सिटी में हुआ हमला पेशावर के स्कूल में हुए अटैक की ही कड़ी है।
– इलाके में 2015 में टेरर अटैक कम हुए। लेकिन लोगों का मानना है कि पाक आर्मी ने हमले रोकने की कुछ खास कोशिशें नहीं की।
– एक नागरिक नूर मोहम्मद खान के मुताबिक, “हम अपने बच्चों के लिए सिक्युरिटी की गारंटी चाहते हैं। महज कंटीले तार की बाड़ लगा देने से सिक्युरिटी नहीं हो जाती।”
– नूर यह भी कहते हैं, “इन हमलों को रोकने के लिए ठोस प्लान बनाना होगा। आर्मी पब्लिक स्कूल में अटैक एक बड़ा मामला था, लेकिन हमने उससे कुछ नहीं सीखा।”
– “आर्मी और सिक्युरिटी एजेंसियां कोशिश कर रही हैं। उनकी असल जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा है। लेकिन वे इसमें फेल रही हैं। आखिर कौन है ये पाकिस्तान तालिबान?”
आतंकियों पर न हो दया
– बाचा खान यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट ख्याम मशाल के मुताबिक, “मैं बुरी तरह डर गया था। जब देश ही सुरक्षित नहीं है, तो मैं कैसे सेफ महसूस कर सकता हूं?”
– पेशावर के बिजनेसमैन बहरवार खान के मुताबिक, “आर्मी स्कूल में हमले के बाद से हम बुरी तरह डरे हुए थे। बाचा खान यूनिवर्सिटी की घटना ने मुझे हिला दिया। मैं तो अपनी बेटी को यूनिवर्सिटी नहीं भेजूंगा।”
– सेल्समैन रहीम शाह का भी कहना है, “हमें और सिक्युरिटी की जरूरत है। जब तक बच्चों को सिक्युरिटी नहीं मिल जाती, लोग उन्हें स्कूल-कॉलेज नहीं भेजेंगे।”
– पेशावर यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट मंजूर खान के मुताबिक, “हमें टेररिस्ट्स पर दया नहीं दिखानी चाहिए। हमें उनसे डरना नहीं, बल्कि लड़ना है। उनसे डरकर हम पढ़ना छोड़ नहीं देंगे।”
गेस्ट को बचाने के लिए कुक ने दी अपनी जान
– आतंकी हमले में मारे गए लोगों में यूनिवर्सिटी का 37 साल का कुक फखर-ए-आलम भी शामिल था। उसने गेस्ट को बचाने के लिए अपनी जान की फिक्र भी नहीं की।
– फखर के पिता शाह हुसैन ने बताया कि वह यूनिवर्सिटी हॉस्टल में कुक था।
– अब्दुल गफ्फार खान की बरसी होने की वजह से कैम्पस में मुशायरे का आयोजन किया गया था। करीब 600 गेस्ट आए हुए थे।
– उसने बुधवार सुबह जल्दी काम पर जाने की बात कही थी।
– जब दशहतगर्तों ने हॉस्टल पर अटैक किया, तब वह कुछ गेस्ट्स को एक रूम में ले गया और दरवाजा बंद कर लिया।
– जैसे ही गेट के पास वह पहुंचा, आतंकियों ने उसे गोली मार दी।
8 आई विटनेस ने बताया-आतंकियों के निशाने पर हॉस्टल था
मौके पर मौजूद रहे स्टूडेंट्स का कहना है कि यूनिवर्सिटी में एक दिन पहले ही एग्जाम खत्म हुए थे। इसलिए हमले के वक्त कई लड़के सो रहे थे। तभी आतंकी उनके कमरों तक आ गए।
स्टूडेंट्स बता रहे हैं कि हमले के वक्त कैसे थे हालात…
1. ”हमलावर हम लोगों जैसे ही यंग थे। उनके पास एके-47 गन थी। उन्होंने फौजियों जैसी जैकेट पहन रखी थी। जब हमला हुआ, तब हम हॉस्टल में सो रहे थे, क्योंकि हमारी कोई क्लास नहीं थी।”
2. ”मैंने खुद तीन लोगों को देखा। हॉस्टल की छत पर एक कोने में दीवार के सहारे एक आतंकी फायरिंग कर रहा था।”
3. ”मैं दो घंटे तक बाथरूम में फंसा रहा। उसके बाद गोलीबारी के बीच मुश्किल से निकलकर बाहर आया।”
4. ”मंगलवार को पेपर खत्म हुए थे। पेपर चल रहे होते तो बहुत नुकसान होता, क्योंकि 4 से 5 हजार स्टूडेंट हॉस्टल में हर वक्त मौजूद होते हैं। मैं घर के लिए निकल रहा था, तभी फायरिंग की आवाज सुनाई दी। वे चार लोग थे। एक दहशतगर्द के पास बंदूक नहीं थी। जब फायरिंग शुरू हुई तो हम वहां से भाग निकले।” 
5. ”दहशतगर्दों के निशाने पर हॉस्टल ही था। फायरिंग की आवाज सुनने के बाद मैंने हॉस्‍टल से निकलने की कोशिश की, लेकिन केमिस्‍ट्री के प्रोफेसर हामिद ने मुझे बाहर जाने से रोक दिया। प्रोफेसर ने अपने हाथ में पिस्‍टल पकड़ रखी थी। हमें रोकने के पहले वो फायर कर चुके थे। तभी हमने देखा कि एक गोली आकर उन्‍हें लगी। हमने देखा कि दो आतंकी गोलियां बरसा रहे हैं। मैं अंदर की ओर भागा। इसके बाद किसी तरह पिछली दीवार जंप कर भाग निकला। तब तक वे आतंकियों के सामने डटे रहे।”
6. ”हमारे साथ दो लेडीज थीं। हम चार लोग थे। हमारे ऑफिस पर फायरिंग हुई, तो कम्प्यूटर और शीशे टूट गए।”
7. ”मैं सुबह यूनिवर्सिटी के अंदर जा रहा था। कुछ सिक्युरिटी वाले मेरे साथ थे। पहली फायर हम पर हुई। सिक्युरिटी वाले बोले कि भागो यार ये तो दहशतगर्द हैं।”
8. ”हम क्लास में थे, तभी फायरिंग की आवाज सुनी। हमने देखा कि तीन टेररिस्ट गोलियां चला रहे हैं। वे हमारे डिपार्टमेंट की तरफ आ रहे थे। तभी एक स्टूडेंट विंडो से जंप कर क्लासरूम से बाहर चला गया।”
किसके नाम पर है यूनिवर्सिटी?
– यूनिवर्सिटी सीमांत गांधी के नाम से मशहूर खां अब्दुल गफ्फार खां के नाम पर है। उन्हें बाचा खान भी कहा जाता था।
– खां ऐसे इकलौते पाकिस्तानी थे, जिन्हें भारत रत्न से नवाजा गया था।
– खां की बरसी के मौके पर यूनिवर्सिटी के अंदर पश्तो मुशायरा हो रहा था।
हमले के पीछे है 132 बच्चों की जान लेने वाला बदनाम चाइल्ड किलर
– रॉयटर्स के मुताबिक, तहरीक-ए-तालिबान के एक ग्रुप ने ही इस हमले को अंजाम दिया है। इसका कमांडर उमर मंसूर है।
– मंसूर दिसंबर 2014 में पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमले का मास्टरमाइंड था। इसमें 132 बच्चों की जान गई थी।
– वह टीटीपी के सरगना हकीमुल्ला मसूद का करीबी रहा है और पेशावर के पास दर्रा आदम खेल का रहने वाला है।
– 37 साल का मंसूर कभी वॉलीबॉल प्लेयर था। उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। इसके बाद भी वह बच्चों को टारगेट करता है।
– पेशावर हमले के बाद से वह ‘चाइल्ड किलर’ के तौर पर बदनाम है।
– मंसूर इतना खतरनाक है कि तालिबान के जो आतंकी फौजियों या बच्चों पर जरा-सा भी रहम दिखाते हैं, वह उन्हें भी मार डालता है।
– वह अक्सर अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर को पार करता है और अफगानिस्तान से हथियार लेकर आता है।

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