PDP-NC और कांग्रेस मिलकर जम्मू-कश्मीर में बना सकती हैं सरकार, मुजफ्फर बेग ने जताया विरोध

जम्‍मू कश्‍मीर में पीडीपी, कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस मिलकर सरकार बना सकती हैं. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी द्वारा पीडीपी के विधायकों को तोड़ने की कोशिशों को देखते हुए यह कदम उठाया जा सकता है. बीजेपी तोड़े गए विधायकों की मदद से अपने सहयोगी सज्‍जाद लोन की पार्टी पीपुल्‍स कांफ्रेंस के नेतृत्‍व में सरकार बनाने की कोशिशें कर रही हैं. PDP के पास 28 विधायक हैं, जबकि नेशनल कांफ्रेंस के पास 15 और कांग्रेस के 12 विधायक हैं. दूसरी ओर, PDP के सांसद मुजफ्फर बेग का कहना है कि यह गठबंधन संभव नहीं है. अगर ऐसा होता है तो जम्‍मू और लद्दाख के लोगों की क्‍या राय होगी.

तीनों पार्टियों के पास कुल मिलाकर 44 विधायक हैं. यह संख्या बहुमत से काफी ज्‍यादा है. नेशनल कांफ्रेंस के सूत्रों ने बताया कि वह गठबंधन सरकार में साझेदार नहीं बनेंगे लेकिन उन्‍हें बाहर से समर्थन देने में कोई समस्या नहीं है.

हालांकि पीडीपी, एनसी और कांग्रेस के संभावित गठबंधन पर पीडीपी के सांसद, मुजफ्फर बैग ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है. उन्‍होंने कहा, अगर ऐसा होता है तो जम्मू के लोगों की प्रतिक्रिया होगी? यह पूरी तरह से मुस्लिम गठबंधन है, लद्दाख के लोगों की इस पर क्‍या राय होगी? ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बातचीत से जम्मू और कश्मीर में मुश्किलें बढ़ेंगी. लद्दाख, जम्मू उस राज्य का हिस्सा नहीं रहेगा, जिसपर किसी एक समुदाय का शासन हो.

सुत्रों के मुताबिक पीडीपी, एनसी और कांग्रेस आपस में हाथ मिलाकर सरकार बनाने की तैयारी में है. बताया जा रहा है कि पहले भी राज्य में सरकार चला चुकी पीडीपी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तैयारी है. बता दें कि ये दोनों पार्टियां 2002 से 2007 के बीच राज्य में सरकार चला चुकी हैं. वर्तमान में पीडीपी के 28 और कांग्रेस के 12 विधायक हैं, इसमें अगर एनसी के 15 विधायक शामिल हो जाते हैं तो आंकड़ा पूर्ण बहुमत से काफी आगे निकल जाएगा.

एनसी सूत्रों के मुताबिक वो सरकार बनाने में कोई रुचि नहीं रखते हैं लेकिन अगर ऐसी स्थिति आती है तो वो बाहर से समर्थन दे सकते है. कहा जा रहा है कि अगर तीनों पार्टियां मिलकर सरकार बनाती है तो भी महबूबा मुफ्ती के मुख्यमंत्री बनने की संभावना कम है. लेकिन बताया जा रहा है कि सरकार का नेतृत्व किसी पीडीपी नेता के हाथ में ही रहेगा.

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने जम्मू-कश्मीर की महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी सरकार से गठबंधन वापस ले लिया था जिसके बाद राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया था. 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन के छह महीने पूरे हो जाएंगे और नियमों के मुताबिक, इसे दोबारा बढ़ाया नहीं जा सकता है. राज्यपाल शासन के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है लेकिन उसके लिए विधानसभा को भंग किया जाना जरूरी है. राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने इस पर कहा है कि ऐसा नहीं किया जाएगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *