PM मोदी के ‘आदर्श ग्राम’ में सांसदों की रुचि नहीं, 100 में से सिर्फ 30 आगे आए

भोपाल. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’ की पहली कार्यशाला में उम्मीद थी कि गांव गोद लेने वाले सारे सांसद शामिल होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बमुश्किल 31 सांसद ही कार्यक्रम में पहुंचे और 30 ने अपने प्रतिनिधि भेज दिए। कार्यशाला में कम से कम 100 सांसदों के आने का अनुमान था। मप्र के भी 11 सांसद ही इसमें पहुंचे।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों को न्योता दिया था। जिन गांवों का इस योजना में चयन हुआ था, वहां के कलेक्टर, सीईओ और सरपंच भी बुलाए गए थे, लेकिन आधे से ज्यादा लोग नहीं आए। कुल 49 कलेक्टर आए। मप्र के 32 कलेक्टर को बुलाया गया था, लेकिन 20 ही आए। सरपंच भी 100 की संख्या में ही पहुंचे।
बीरेंद्र सिंह ने कहा-अच्छा काम करने पर भी पांच साल बाद हो जाती है छुट्टी
एक साल पहले ही कांग्रेस से भाजपा में शामिल होकर केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री बने चौधरी बीरेंद्र सिंह का कहना है कि एक बार चुनाव होने के बाद सरकार का कार्यकाल पांच साल की बजाए 7 या 10 साल का होना चाहिए। पांच साल का वक्त अच्छे काम और प्रयोगों के लिए कम पड़ता है। और हमारे देश की आम जनता ऐसी है कि अच्छे आदमी की भी पांच साल बाद छुट्टी कर देती है।
बीरेंद्र सिंह बुधवार को भोपाल में सांसद आदर्श ग्राम योजना के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। बीरेंद्र सिंह से प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जब पूछा गया कि 10 साल तक सरकार रखने के लिए क्या संविधान बदलने की पहल करेंगे। तो उन्होंने सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गेहलोत की तरफ इशारा करते हुए कहा कि वे भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य हैं।

 

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