RBI की मौद्रिक नीति कल, सस्ते कर्ज की राह में महंगाई बनेगी रोड़ा

नई दिल्ली। सस्ते कर्ज के रास्ते में एक बार फिर महंगाई खड़ी हो गई है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक के लिए इस बार इंडस्ट्री और सरकार के उम्मीदों को पूरा करना आसान नहीं है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार 4 अगस्त को पेश होने वाली मौद्रिक समीक्षा नीति में आरबीआई के लिए रेपो रेट में कटौती करना आसान नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रिटेल महंगाई दर जून में आठ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इसे देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट (7.25 फीसदी) में कोई बदलाव नहीं कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो सबसे बड़ा झटका इंडस्ट्री को लगेगा, जो मांग बढ़ाने के लिए इंटरेस्ट रेट में कटौती का बेसब्री से इंतजार कर रही है। इसके पहले आरबीआई ने जून में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी।
रिटेल महंगाई दर आठ महीने में सबसे ज्यादा
जून में रिटेल महंगाई दर 5.54 फीसदी के साथ पिछले 8 महीने में सबसे ज्यादा है। ब्याज दरों में कटौती के लिए आरबीआई हमेशा रिटेल महंगाई दर को पैमाना मानता है। ऐसे में बढ़ी महंगाई को देखते हुए उसके लिए इंटरेस्ट रेट में कटौती करना आसान नहीं है। एसबीआई के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ सौम्या कांती घोष के अनुसार खाने-पीने की चीजें महंगी होने से रिटेल महंगाई दर में इस बार बढ़ोतरी हुई है। हालांकि मानसून और दूसरे ट्रेंड को देखते हुए ऐसी उम्मीद है कि रिटेल महंगाई दर कम होगी। लेकिन अभी भी आरबीआई के 4 फीसदी टारगेट पर आना काफी मुश्किल है। इसे देखते हुए आरबीआई के लिए वित्त वर्ष 20-15-16 में ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल है।

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