SC/ST एक्ट पर एलजेपी का मोदी सरकार को अल्टीमेटम, कहा- मांगे नहीं पूरी हुईं तो होगा उग्र आंदोलन

बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए से पहले टीडीपी अलग हुई। शिवसेना ने अविश्वास प्रस्ताव पर साथ छोड़ा और आए दिन पीएम मोदी और सरकार पर निशाना साधती रहती है। अब बीजेपी की एक और सहयोगी पार्टी लेक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने भी बीजेपी और मोदी सरकार को आंखे दिखाना शुरू कर दिया है।

लोजपा ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो अगले महीने उनकी पार्टी दलित संगठनों के साथ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेगी।

चिराग पासवान ने शुक्रवार को साफ कहा कि बीजेपी को समर्थन मुद्दों पर आधारित है। पार्टी ने दलितों के उत्पीड़न के खिलाफ कानून में सख्त प्रावधान करने तथा 9 अगस्त तक एनजीटी के अध्यक्ष एके गोयल को पद से हटाने की मांग की है।

चिराग पासवान ने कहा, एससी/एसटी एक्ट मामले में हम चाहते हैं कि ऑर्डिनेंस लाया जाए, लेकिन अब ये हो नहीं सकता। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम के मूल प्रावधानों को बहाल करने के लिए अध्यादेश लाने की मांग पिछले चार महीने से कर रही है लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। इसलिए अब हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार 7 अगस्त को इसे बिल के तौर पर संसद में पेश करे और पुराने कानून को लागू किया जा सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 9 अगस्त को होने वाला दलितों का आंदोलन 2 अप्रैल से ज्यादा उग्र हो सकता है।

हालांकि उन्होंने बीजेपी को सीधेतौर पर धमकी देने से बचते हुए कहा कि एलजेपी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में पूरा विश्वास है, क्योंकि उनकी सरकार ने दलितों के लिए काफी कुछ किया है। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने (पीएम) साफ कहा है कि एससी-एसटी ऐक्ट में कॉमा, फुल स्टॉप कुछ भी नहीं बदलेगा।’

यह पूछे जाने पर कि अगर 9 अगस्त तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तब क्या उनकी पार्टी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग होने पर विचार करेगी? एलजेपी नेता ने कहा कि जब समय आएगा तब हम कदम उठाएंगे।

आपको बता दें कि कानून को मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग को लेकर कई दलित संगठनों एवं आदिवासी समूहों ने भारत बंद का आह्वान किया है।

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