नई दिल्ली। आयकर विभाग ने उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में सिविल भवन-निर्माण एवं रियल एस्टेट के कारोबार में लिप्त तथा शैक्षणिक संस्थानों को संचालित करने वाले लोगों पर देश के कई राज्यों में उनकी व्यावसायिक संस्थाओं पर छापामारी कर तलाशी व जब्ती अभियान चलाया। कोलकाता स्थित एक प्रवेश प्रदाता के परिसर में भी छापेमारी की गई है।

अभियान के दौरान लखनऊ, मैनपुरी, मऊ, कोलकाता, बेंगलुरु और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों में फैले 30 से अधिक परिसरों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई है। तहकीकात के दौरान हार्ड कॉपी दस्तावेजों तथा डिजिटल डेटा सहित बड़ी संख्या में आपत्तिजनक सबूत मिले हैं और जब्त किए गए हैं।
यह पाया गया कि सिविल भवन-निर्माण के व्यवसाय में लगी कई संस्थाएं करोड़ों रुपये के फर्जी खर्च के दावे में शामिल थीं। जाली बिल बुक, स्टांप एवं नकली सप्लायरों की हस्ताक्षरित चेक बुक सहित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं और उन्हें जब्त कर लिया गया है। एक कंपनी के मामले में इसके निदेशकों की 86 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित आय का पता चला है। कंपनी से संबंधित व्यक्ति ने अपनी अघोषित आय के रूप में 68 करोड़ रुपये की राशि स्वीकार की है और उस पर कर का भुगतान करने की पेशकश की है। एक मालिकाना प्रतिष्ठान के प्रकरण में, पिछले कुछ वर्षों के दौरान 150 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार से संबंधित लेखा बही खातों में प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। एक अन्य संस्था की जांच में भी यह पाया गया कि उसने अपनी अघोषित आय और निवेश को रूट करने के लिए मुखौटा कंपनियों के माध्यम का इस्तेमाल किया है। जांच के दौरान 12 करोड़ रुपये के ऐसे अस्पष्ट निवेश की पहचान की गई है। एक अन्य व्यक्ति के केस में एक मुखौटा कंपनी में 11 करोड़ रुपये के रहस्यमय निवेश और 3.5 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियों में निवेश की पहचान की गई है।

इसके अलावा, इन व्यक्तियों को आवास प्रविष्टियां प्रदान करने के संबंध में कोलकाता स्थित एक आवास प्रवेश प्रदाता को भी शामिल किया गया था। जांच में यह पाया गया कि इन जालसाज कंपनियों के माध्यम से एंट्री ऑपरेटर ने 408 करोड़ रुपये की फर्जी शेयर पूंजी और 154 करोड़ रुपये के फर्जी असुरक्षित ऋण की आवास प्रविष्टियां प्रदान करने के लिए विभिन्न मुखौटा कंपनियों का गठन किया था। तलाशी अभियान के दौरान हवाला लेनदेन का पर्याप्त मात्रा में डिजिटल डेटा भी मिला और जब्त किया गया। एंट्री ऑपरेटर ने उपरोक्त कार्यप्रणाली को स्वीकार किया है और 5 करोड़ रुपये की बेहिसाब कमीशन आय का भी खुलासा किया है।

इस पूरी कार्रवाई में शामिल बेंगलुरु स्थित ट्रस्ट और उससे संबंधित संस्थाओं के संबंध में यह जानकारी निकल कर सामने आई है कि 80 लाख रुपये की पर्याप्त मात्रा में ट्रस्ट फंड दान की आड़ में गैर-भरोसेमंद उद्देश्यों के लिए केरल स्थित कुछ संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया है, जिसमें मरकज़ु सकफाथी सुन्निया ट्रस्ट और मरकज़ नॉलेज सिटी ट्रस्ट शामिल हैं, जो खाड़ी देशों से जुड़े हुए हैं और इससे न्यासियों को लाभ मिलना है। इन सब से प्रथम दृष्टया छूट के दावे के साथ-साथ फेमा प्रावधानों के लिए आयकर अधिनियम, 1961 के तहत ट्रस्टों के पंजीकरण से संबंधित प्रासंगिक प्रावधानों के उल्लंघन के संकेत मिलते हैं। पिछले तीन वर्षों में न्यासियों के व्यक्तिगत लाभ के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये के कैपिटेशन शुल्क के संग्रह के संबंध में और ट्रस्ट के खाते से किए गए 4.8 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च के संबंध में साक्ष्य भी प्राप्त किए गए हैं। तलाशी अभियान में 1.12 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकदी बरामद हुई है।

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