नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में बुधवार को कई अहम फैसले हुए। ऐसी कंपनियां जो स्टील या पावर सेक्टर में नहीं हैं या सिर्फ माइनिंग में हैं, वे भी कोयला खदानों की नीलामी में हिस्सा ले सकेंगी। मौजूदा नियमों के मुताबिक कोल और लिग्नाइट खनन का लाइसेंस उन्हीं कंपनियों को दिया जाता है जो आयरन-स्टील, पावर और कोल वॉशिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। कैबिनेट ने कोयला खदानों की नीलामी के नियमों को आसान बनाने के लिए खनिज कानून (संशोधन) अध्यादेश-2020 को मंजूरी दी। इस अध्यादेश के जरिए माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेग्युलेशन) एक्ट 1957 और कोल माइन्स (स्पेशल प्रोविजन्स) एक्ट 2015 में बदलाव होगा। कोल समेत अन्य सेक्टर की 46 माइन्स की लीज 31 मार्च को खत्म हो रही है। इनकी 31 मार्च से पहले नीलामी अध्यादेश के जरिए संभव हो पाएगी। नीलामी में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि दूसरी कंपनी को आसानी से लीज ट्रांसफर हो जाए और प्रोडक्शन जारी रहे। कैबिनेट ने नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड (एनआईएनएल) में 100% हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी भी दे दी।

एनआईएनएल में केंद्र सरकार की 4, ओडिशा सरकार की 2 कंपनियों के शेयर

कंपनीएनआईएनएल में शेयर
मिनरल्स एंड मेटल ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (एमएमटीसी)49.78%
ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन (ओएमसी)20.47%
इंडस्ट्रियल प्रमोशन एंड इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ ओडिशा (इपिकॉल)12%
नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएमडीसी)10.10%
भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल)0.68%
मेकॉन0.68%

‘फैसलों से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार होगा, रोजगार बढ़ेंगे’

सरकार का कहना है कि एनआईएनएल के विनिवेश से जनहित की योजनाओं के लिए राशि का इंतजाम होगा। यह उम्मीद भी है कि खरीदार नए प्रबंधन, तकनीक और निवेश के जरिए कंपनी को आगे बढ़ाएगा। कारोबार को बढ़ाने के लिए इनोवेटिक तरीकों का इस्तेमाल करने से रोजगार के मौके बढ़ने के भी आसार हैं। कोल माइनिंग के नियम आसान करने से प्रोजेक्ट लागू करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार होगा। खनिज क्षेत्रों वाले सभी पक्षों को इससे फायदा होगा। खनिज एवं कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी, पेट्रोलियम-नेचुरल गैस एवं इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।

कैबिनेट के अन्य फैसले
1. इन्‍द्रधनुष गैस ग्रिड लिमिटेड की पूर्वोत्‍तर गैस ग्रिड परियोजना के लिए कम पड़ रही राशि के इंतजाम (वायबिलिटी गैप फंडिंग) की मंजूरी। यह अनुमानित लागत (9,265 करोड़ रुपए) के 60% से ज्यादा नहीं होगी।

2. फ्रांस के साथ प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते को मंजूरी। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और छात्रों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, कुशल पेशेवरों के आवागमन को बढ़ावा मिलेगा।

3. स्वीडन के साथ ध्रुवीय विज्ञान में सहयोग समझौते को मंजूरी। इस क्षेत्र में दोनों देशों को एक-दूसरे की विशेषज्ञता साझा करने में मदद मिलेगी।     
4. गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर, जामनगर में आयुर्वेद संस्थानों के समूह को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा देने को मंजूरी।
5. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के बीच स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में सहयोग के समझौते को मंजूरी।
6. भारतीय रेल को ऊर्जा के मामले में आत्म निर्भर बनाने के लिए भारत और ब्रिटेन के बीच समझौते को मंजूरी।

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