आतंकियों के साथ रिश्ता रखने वाले डीएसपी देवेंद्र सिंह पर शिकंजा कसा गया. गृहमंत्रालय ने अब मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया है. सोमवार को देवेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया था. डीएसपी देविंदर सिंह को नवीद बाबू और अलताफ नाम के आतंकवादियों के साथ शनिवार को हिरासत में लिया गया था. देवेंद्र सिंह के घर से दो पिस्तौल और एक एके-47 भी राइफल जब्त की गई थी.

देवेंद्र सिंह का विवादों से रहा है नाता

आतंकियों के साथ गठजोड़ के आरोप में पकड़ा गया डीएसपी देवेंद्र सिंह का शुरु से ही विवादों से नाता रहा है. वह  1992 में जम्मू कश्मीर पुलिस में भर्ती हुआ था और बताया जाता है कि वह प्रोबेशन पर था, उसी दौरान उस पर भ्रष्टाचार का आारोप लगा था. कहा जाता है कि उस समय उसने नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप में पकड़े गए तस्करी और नशीले पदार्थों को उसने गायब कर दिया था. मामले की जांच हुई तो उस समय संबधित प्रशासन ने उसे सेवामुक्त करने की सिफारिश की थी. लेकिन वह किसी तरह बच गया. एसओजी में रहते हुए उसने श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र में एक व्यापारी का मसलों व चाय पत्ती से लदा एक ट्रक गायब करा दिया था. उस घटना में ट्रक ड्राइवर का भी पता नहीं चल पाया था. व्यापारी उस समय जम्मू कश्मीर के तत्कालीन कार्यवाहक मुख्यमंत्री गुलाम मोहिउददीन शाह का निकट संबंधी था.

डीएसपी को लेकर गरमाई सियासत

उधर डीएसपी की गिरफ्तार की लेकर सियासत गरमा गई है. बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पाकिस्तान की भाषा बोलती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आतंक में धर्म ढूंढ़ा है. दरअसल अधीर रंजन चौधरी ने एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंन कहा, ”अगर इत्तेफाक से दविंदर सिंह का नाम दविंदर खान होता तो आरएसएस की ट्रोल रेजीमेंट की प्रतिक्रिया ज्यादा तीखी और मुखर होती. वर्ण, मत और संप्रदाय से इतर देश के दुश्मनों की निंदा होनी चाहिए.”

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