विपक्षियों के लिए धर्मसंकट, कांग्रेस की रणीनिति फैल, पंजाब और उत्तरप्रदेश में हो असर

भोपाल। प्रकाश पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अचानक से राष्ट्र के नाम संबोधन करने टीव्ही पर सीधे आए और देश को एक बड़ी सौगात दे गए। उन्होने जहां देश वासियों को प्रकाश पर्व की हार्दिक बधाई दी, वहीं दूसरी तरफ बीते कई महीनों से चले आ रहे कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध को कानून वापिस लेने की घोषण कर विराम दे दिया। उनके फैसले को जहां राजनीतिक तौर पर जोडक़र देखा जा रहा है। वहीं रणनीति के तौर पर आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह फैसला भाजपा के लिए तुरूप का इक्का साबित होगा । तो दूसरी तरफ कांग्रेस सहित समस्त विपक्षी पार्टियों के लिए यह फैसला गले नहीं उतर रहा है। साथ ही पंजाव और उत्तरप्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों के चलते यह विपक्षियों के भाजपा की ओर से कारारा जबाब है। जिसका कांग्रेस पार्टी सहित अन्य दलों के लिए एक झटका है।

मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हम पूरी विनम्रता से किसानों को समझाते रहे। बातचीत भी होती रही। कानून के जिन प्रावधानों पर उन्हें ऐतराज था उन्हें सरकार बदलने को तैयार हो गई। साथियों आज गुरु नानक देवजी का पवित्र पर्व है यह समय किसी को दोष देने का नही है। मैं आज पूरे देश को यह बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया है। इसी महीने हम इसे वापस लेने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर देंगे।
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि किसानों का आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैंने किसानों की परेशानियों और चुनौतियों को बहुत करीब से देखा है। जब देश ने मुझे 2014 में प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सेवा का मौका दिया, तो हमने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। बहुत लोग अनजान हैं कि देश के 100 में से 80 किसान छोटे किसान हैं। उनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है। इनकी संख्या 10 करोड़ से भी ज्यादा है। उनकी जिंदगी का आधार यही छोटी सी जमीन का टुकड़ा है। किसान इसी जमीन से अपने परिवार का गुजारा करते हैं।

उन्होंने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, ” आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। सरकार एमएसपी के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करें। ”

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणी की और कहा कि इसके लिए 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद सत्र में प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

 

 

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