बटाला (पंजाब).  भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि नागरिकता कानून में किए गए संशोधन का हर हिंदुस्तानी को समर्थन करना चाहिए। जिन्हें जिन्ना वाली आजादी चाहिए, उनके लिए बस चला देते हैं। वह उसमें बैठें और पाकिस्तान जाकर आराम से जिन्ना वाली आजादी का मजा लें। पात्रा ने सोमवार को पंजाब के बटाला में तिरंगा यात्रा के शुभारंभ के दौरान यह बात कही।

पात्रा ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले गैर-मुस्लिमों पर अत्याचार होता है। हिंदू-सिख बेटियों को सरेआम घर से उठा लिया जाता है और उनका धर्म परिवर्तन कर दिया जाता है। ऐसे सताए हमारे भाइयों को हिंदुस्तान में रहने का हक देने के लिए मोदी सरकार ने जो सीएए का प्रावधान किया है, उसका हर हिंदुस्तानी को समर्थन करना चाहिए।

‘पाकिस्तान में मुस्लिमों पर मजहबी अत्याचार नहीं’
संबित पात्रा ने कहा, ‘कहा जा रहा है कि अहमदिया मुसलमानों और शियाओं पर पाकिस्तान में जुल्म होता है। इसलिए उन्हें भारत की नागरिकता दी जानी चाहिए। ऐसा नहीं है। पाकिस्तान में शिया और अहमदिया मुसलमानों पर जो अत्याचार हो रहे हैं वो मजहबी अत्याचार नहीं है। कुछ लोग नारे लगा रहे हैं, जिन्ना वाली आजादी चाहिए। वह आजादी तो 1947 में जिन्हें मिलनी थी, मिल गई। अब भी अगर कोई जिन्ना वाली आजादी लेने से रह गया है तो एक बस चला देते हैं वो बस में बैठकर पाकिस्तान में चला जाए और जिन्ना वाली आजादी का मजा ले, किसने रोका है।’

शाहीन बाग पर कहा- महीनेभर से परेशान है दिल्ली की जनता
दिल्ली के शहीन बाग में सीएए कानून के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन पर तंज कसते हुए संबित पात्रा ने कहा कि पिछले महीनेभर से देश की राजधानी में सड़क रोक रखी है। जनता परेशान हो रही है, लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। यहां तक कि दिल्ली की सरकार के मंत्री इसके समर्थन में खुले नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर जब उनसे एक हिंदू की अर्थी को निकलने के रास्ता देने की बात कही गई तो उन्होंने कहा, ‘शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने अर्थी को रास्ता देकर देश पर कोई एहसान नहीं किया है। जिस सड़क को जाम करके बैठे हैं, वह हिंदुस्तान की जनता की सड़क है।

…फिर कॉफ्रेंस छोड़कर चले गए संबित
प्रेस क्रॉफ्रेंस के दौरान एक मीडियाकर्मी ने संबित पात्रा से पूछा कि सीएए के पक्ष में निकाली जा रही यात्रा की होर्डिंग पर शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की तस्वीर इस्तेमाल की गई है। क्या बता सकते हैं कि अगर भगत सिंह आज जिंदा होते तो मजहब के आधार पर नागरिकता देने वाले के कानून के हक में खड़े होते या उसका विरोध करते?’ इस पर कुछ देर तो संबित ने टालने की कोशिश की, मगर एक के बाद एक मीडिया के सहयोगियों की तरफ से यह सवाल रिपीट किए जाने का क्रम शुरू हुआ तो संबित प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में ही बंद कर चलते बने।

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