रायपुर (अमिताभ अरुण दुबे). केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर बनाई गई क्षेत्रीय परिषदों या समन्वय समिति की बैठकें उपयोगी साबित हों, केवल बैठक ही न होकर रह जाए, इनसे राज्यों के हितों के लिए कोई समाधान की दिशा भी निकले। इसके लिए किस तरह के उपाय अपनाने चाहिए। खासतौर पर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्य जो लंबे समय से नक्सल समस्या से जूझ रहे हैं। रायपुर में मंगलवार को होने जा रही 4 राज्यों की क्षेत्रीय परिषद की बैठक से पहले भास्कर ने छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल और मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ से ऐसी बैठकों की प्रासंगिकता पर सीधे सवाल किए।

मुख्यमंत्रियों से सीधी बातचीत के अंश…

सीएम भूपेश बघेल-

सवाल : क्या क्षेत्रीय परिषद या समन्वय समिति की बैठकें उपयोगी साबित हो रही हैं? 
जवाब : समन्वय और क्षेत्रीय परिषद की बैठकों का काॅन्सेप्ट अब अनुपयोगी साबित हो रहा है। क्योंकि इसमें उन राज्यों को भी शामिल कर लिया गया है, जिनका हमारे राज्य से जुड़ी समस्या से सीधा संबंध ही नहीं होता है।

सवाल : तो इसका समाधान कैसे निकलेगा? 
जवाब : एक जैसी समस्याओं को लेकर कॉमन फोरम बनाने की जरूरत है। राज्य आपस में इन पर चर्चा करें और समाधान के रास्ते निकालने की कोशिश करें, यही तरीका बेहतर साबित होगा।

सवाल : नक्सल समस्या के लिए ऐसी बैठकें उपयोगी साबित हों, इसके लिए आपका फॉर्मूला क्या है? 
जवाब : नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अंदर तक प्रशासन की पैठ होगी तो समस्या का समाधान का भी निकलने लगेगा। हमने ये प्रयोग किया जो सफल भी साबित हो रहा है। आज सुरक्षा बलों के जवान लोगों के बीच काम कर रहे हैं, इससे लोगों का भी भरोसा बढ़ रहा है। अब जवान गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पतालों कैंपों तक पहुंचा रहे हैं।  

सवाल : छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में नक्सल समस्या का निदान के लिए और क्या किया जाना चाहिए?
जवाब : छत्तीसगढ़ ने समाधान के लिए एक नई अप्रोच के साथ काम किया है। हम नक्सल पीड़ित इलाकों में बच्चों को खेलों से जोड़ रहे हैं। नौजवानों को रोजगार से, किसानों महिलाओं हर वर्ग के लिए माइक्रो लेवल पर काम कर रहें हैं। इससे बहुत ज्यादा फर्क आया है।  

सवाल : लोगों का विश्वास जीतने के लिए प्रदेश सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए?
जवाब : हमने सबसे पहले टाटा संयंत्र की जमीन आदिवासियों को वापस की। दूसरा उन पर दर्ज फर्जी केस वापस ले रहे हैं। तीसरा युवाओं को सड़क के पैचवर्क का ठेका देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। 

कन्हर बांध के विरोध में छत्तीसगढ़

  •  राज्याें के बीच आर्थिक और सामाजिक नियोजन के क्षेत्र में समान हित, सीमा विवाद, कानून व्यवस्था व परिवहन से जुड़े मसलों पर परिषद में चर्चा होती है।
  •  छत्तीसगढ़ का उत्तराखंड के साथ कोई विवाद नहीं हैं, लेकिन सरगुजा की सीमा में उत्तरप्रदेश द्वारा कन्हर नदी पर बनाए जा रहे बांध को लेकर विवाद है। छत्तीसगढ़ इस बांध का विरोध कर रहा है। विपक्ष में रहते स्वयं बघेल भी विरोध करते रहे हैं। 
  •  मप्र के साथ सीमा जैसा विवाद तो नहीं, लेकिन वित्तीय लेनदेन को लेकर विवाद है। दोनों राज्यों के बीच अंतिम बंटवारा अब तक नहीं हो पाया है। 
  •  सीएम बघेल केंद्रीय बलों का डिप्लायमेंट चार्जेस 6300 करोड़ माफ करने, गर्मी के दिनों में नक्सल आपरेशन तेज करने केंद्र द्वार स्वीकृत 9 नई बटालियनों को जल्द भेजने जैसे मुद्दे उठा सकते हैं।

सीएम कमलनाथ- 

सवाल : क्षेत्रीय परिषद या नक्सल मुद्दे पर बनी समन्वय समिति बैठकें केवल औपचारिकता बनकर न रह जाएं इसके लिए आपका क्या फॉर्मूला है? 
जवाब : संघीय ढांचे में सतत संवाद जरूरी है। इस दृष्टिकोण से इन बैठकों का अपना महत्व होता है, मगर केंद्र को चाहिए कि ऐसी बैठकों में निकलने वाले निष्कर्षों पर गंभीरता से राज्यों की मदद करे, तब ही ये बैठकें सार्थक सिद्ध होंगी।  

सवाल : मध्य प्रदेश भी नक्सल समस्या से जूझ रहा है कॉमन फोरम पर आप क्या कहेंगे? 
जवाब : एक लंबे अरसे से केंद्र के साथ समन्वय स्थापित करके मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र नक्सली समस्याओं के लिए साझा रणनीति के साथ काम कर रहे हैं । वैसे अपेक्षाकृत छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में नक्सली समस्या अधिक है, मगर मध्यप्रदेश के छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से लगे सीमावर्ती जिलों बालाघाट और मंडला में नक्सली मूवमेंट पाया जाता है। मगर हाल के वर्षों में नक्सली हमले की कोई बड़ी वारदात मध्य प्रदेश में नहीं घटित हुई है। 

सवाल : क्षेत्रीय परिषद या समन्वय समिति की बैठकों को लेकर आपकी अपेक्षाएं क्या हैं? आपके नजरिए से क्या होना चाहिए? 
जवाब : जहां तक नक्सली समस्या के संदर्भों का प्रश्न है, तो बतौर मुख्यमंत्री यह मेरी पहली बैठक है। मध्य प्रदेश की कुछ बुनियादी अपेक्षाएं हैं जिसे हम इस बैठक में भी रखेंगे। केंद्र सरकार ने हाल ही में ड्रोन को लेकर गाइडलाइन जारी की है, मगर उसमें राज्यों के सरोकारों को शामिल नहीं किया गया है। जैसे लॉ एंड ऑर्डर स्टेट सब्जेक्ट है ,अर्थात काफ़ी हद तक नक्सली समस्या से राज्यों को निपटना पड़ता है। ड्रोन जैसे आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में राज्यों को अधिक स्वायत्तता दी जानी चाहिए। एक और महत्वपूर्ण विषय को हम इस बैठक में रेखांकित करने वाले हैं कि मध्य प्रदेश प्रदेश काउंटर टेरेरिज्म और काउंटर इंसर्जेनसी का एक बड़ा ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करना चाहता है, जिसमें हम केंद्र सरकार की मदद चाहते हैं। भारत सरकार ने पुलिस मॉडर्नाइजेशन के लिए सन 2000 से राज्यों को केंद्रीय अनुदान देना प्रारंभ किया था, जिसे बढ़ाने की अपेक्षा कम कर दिया गया है। अब तो लगभग आधा कर दिया गया है जिससे राज्यों को पुलिस के आधुनिकीकरण में परेशानियां आ रही हैं। हम केंद्र से अपेक्षा करेंगे कि वो हमारी इस मांग को पूरा करे।

सवाल : आपके नजरिए से क्या इस तरह की बैठकें होती रहनी चाहिए या नहीं?
जवाब : संघीय ढांचे के सुदृढ़ संबंधों के लिए अनिवार्य रूप से ऐसी बैठकें होनी चाहिए।

सवाल : क्या नक्सली नेताओं से बातचीत का रास्ता निकालना चाहिए? ये कितना कारगर रहेगा?
जवाब : प्रजातंत्र में हर समस्या का समाधान बातचीत से ही होना चाहिए। मगर मेरी मान्यता है कि तीव्रता से विकास अगर इन प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचाया जाए तो काफी हद तक हम इस समस्या पर काबू पा सकेंगे ।हमें हर हाल में शिक्षा ,स्वास्थ्य और रोजगार के समुचित अवसर इन क्षेत्रों में उपलब्ध कराने होंगे। ये क्षेत्र समृद्ध होंगे तो नक्सली समस्या से खुद ब खुद मुक्त हो जाएंगे।

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