भोपाल। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी अमर शहीद बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस समारोह में शामिल होने के लिए भोपाल के जंबूरी मैदान स्थित मंच पर पहुंचे। जहां आदिवासी कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य के साथ उनका स्वागत किया। मंच पर प्रधानमंत्री को झाबुआ से लाई गई आदिवासियों की पारंपरिक जैकेट और डिंडोरी से लाया गया आदिवासी साफा पहनाया गया। भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री और आदिवासी नेता ओमप्रकाश धुर्वे ने स्वागत के दौरान उनके पैर छूने की कोशिश की तो प्रधानमंत्री ने उन्हें रोक दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सर्वप्रथम मोर सगा जनजाति बहन-भाईयों को जौहार करते हुए संबोधन का आगाज किया। उन्होने कहा कि भारत में आजादी के बाद पहली वार देश में भगवान बिरसा मुण्डा के जन्मदिवस को आदिवासी गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होने आदिवासियों के द्वारा प्रस्तुत किए गए स्वागत गीत की व्याख्या करते हुए कहा कि पारंमपारिक नृत्य और गीत में जंगलों में जीवन व्यतीत करने वाले आदिवासियों ने हमे नई रोशनी दी है। देश व प्रदेश में आदिवासियों के जनहित की कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में आज मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत नई योजना का प्रारंभ आज से किया है। उन्होंने भगवान बिरसा के दृष्टिकोण की चर्चा करते हुए कहा, भगवान बिरसा जानते थे कि आधुनिकता के नाम पर विविधता, प्राचीन पहचान और प्रकृति के साथ सामजस्य बिठाने का प्रयास समाज के कल्याण का तरीका नहीं है लेकिन इसके साथ-साथ ही वे आधुनिक शिक्षा के भी प्रबल समर्थक थे और अपने ही समाज की बुराइयों और कमियों के खिलाफ आवाज उठाने का साहस रखते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम का उद्देश्य भारत की सत्ता, भारत के लिए निर्णय लेने की अधिकार-शक्ति भारतीयों के हाथों में स्थानांतरित करना है। इसके अलावा ‘धरती आबा’ की लड़ाई भी उस सोच के खिलाफ थी जो भारत के जनजातीय समाज की पहचान मिटाना चाहती थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘भगवान बिरसा ने समाज के लिए जीवन जिया, अपनी संस्कृति और अपने देश के लिए अपने प्राणों का परित्याग कर दिया। इसलिए, वह आज भी हमारी आस्था में, हमारी भावना में हमारे भगवान के रूप में उपस्थित हैं।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि धरती आबा बहुत लंबे समय तक इस धरती पर नहीं रहे लेकिन उन्होंने जीवन के इस छोटे से कालखंड में देश के लिए एक पूरा इतिहास लिखा और भारत की पीढिय़ों को दिशा दी।

इससे पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्र शिवराज सिंह बिरसा मुण्डा की जयंती अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्विवराज सिंह ने कहा कि प्रदेश के उन आदिवासी वाहुल्य ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सहकारी समितियां नहीं है वहां पर आदिवासी युवाओं को बैंक ऋण दिलाकर वाहन के माध्यम से अनाज पहुंचाया जागा। जिससे आदिवासी युवा भाईयों को राजगार मिलेगा तो राशन से बंचित रहने वाले लोगों तक अब खुद राशन चलकर माह में एक दिन निश्चित अवधि में पहुंचेगा । इस योजना के शुभारंभ की घोषणा मंच से मुख्यमंत्री ने की। बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘आदिवासी गौरव दिवस’ के रूप में मना रही है। आपको बताते हैं कि भगवान बिरसा मुंडा कौन थे और आदिवासी समाज के लोग उनकी पूजा क्यों करते हैं?

झारखण्ड में हुआ था जन्म
बतादें कि 15 नवंबर 1875 के दिन उनका जन्म झारखण्ड के खुटी जिले के उलीहातु गांव में हुआ था। जनजातीय समुदाय के लोग भगवान बिरसा मुंडा को अपना आइडियल मानते हैं। मुंडा ने अंग्रेजों का डंटकर सामना किया था और लगान वापसी के लिए उन्होंने अंग्रेजों को मजबूर कर दिया था। यही नहीं उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध भी छेड़ दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें ब्रिटिश सरकार ने उनके साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन, इसके बावजूद वे न कभी झुके और न ही इस आंदोलन से पीछे हटे।
उस समय अंग्रजों का अत्याचार चरम पर था
मालूम हो कि जिस समय बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था उस समय देश पर अंग्रेजों का अत्याचार चरम पर था। समाज का हरेक तबका परेशान था। कृषि प्रणाली में लगातार बदलाव किये जा रहे थे। इस बदलाव से किसान समेत आदिवासी समाज के लोग भूखे मरने की स्थिति में आ गए थे। आदिवासियों की जमीनें उनसे छीनी जा रही थीं। साथ ही उनका जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। तब बिरसा मुंडा युवा हो रहे थे और यह सब देखकर परेशान रहते थे। उनके अंदर अंग्रेजों के प्रति विरोध का भाव उत्पन्न हो चुका था।

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