बरेली. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को उत्तर प्रदेश के बरेली में एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा- हमारे देश का संविधान कहता है कि हमें भावनात्मक एकजुटता लाने की कोशिश करनी चाहिए। वह भावना क्या है? भावना ये है कि यह देश हमारा है। हम अपने महान पूर्वजों के वंशज हैं। विविधता के बावजूद हमें साथ रहना है और इसे ही हम हिंदुत्व कहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘रुढ़िवादियों से मुक्त जिस भारत की गांधी जी ने कल्पना की थी उस तरह के भारत के निर्माण की कल्पना करना जरूरी है। समस्या स्वतंत्र होना नहीं है, हम बार-बार गुलाम होते रहे हैं, इसलिए बार बार स्वतंत्र होते रहे हैं। मुट्ठी भर लोग आते हैं और हमें गुलाम बनाते हैं। ऐसा इसलिए हुआ कि हमारी कुछ कमियां रहीं हैं।

भागवत ने इजरायल का जिक्र करते हुए कहा कि वो दुनिया में सम्पन्न देश है। आज उसकी दुनिया में धाक है। उसको हाथ लगाया तो अंजाम भुगतना पड़ेगा। हमारा देश करोड़ों की जनसंख्या वाला देश बन गया है। लेकिन अभी हमें और मजबूत होने की जरूरत है।

हमने कितनी प्रगति की है यह इजरायल से सीखने की जरूरत 

उन्होंने कहा कि संविधान में देश के भविष्य की तस्वीर पूरी तरह साफ है। हमारा संविधान तो प्रारंभ और गंतव्य बताने वाला है, लेकिन पिछले 70 वर्ष में हमने कितनी प्रगति की है यह तो हमें इजरायल जैसे छोटे से देश से सीखने की जरूरत है। जिसने न सिर्फ अपनी आजादी के लिए कई लड़ाई लड़ी और आज वह दुनिया के समृद्धिशाली देशों में से एक है।

संघ प्रमुख ने कहा कि अपने देश के संविधान में भविष्य के भारत की कल्पना की गई है। संविधान को पढ़िए। स‍ंविधान की प्रस्तावना पढ़िए, नागरिक अधिकार पढ़िए , नागरिक कर्तव्य पढ़िए, मार्गदर्शक तत्वों का प्रकरण पढ़िए। भविष्य के भारत का रुप है। संविधान की मूल प्रति के पन्ने पन्ने पर जो चित्र है, उन चित्रों में से उस प्रेरणा का स्रोत आया है।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रारंभ बिंदु क्या है, हमारा गंतव्य क्या है। इन दोनो को बताने वाला हमारा संविधान है। संविधान को जनता को समर्पित करने के पहले और बाद में बाबा साहब अंबेडकर के दिए गए दोनों भाषणों में भारत के भविष्य की कल्पना की गई है। 

‘भविष्य का भारत’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में शामिल हुए थे भागवत 

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शनिवार शाम करीब साढ़े छह बजे कड़ी सुरक्षा में बरेली पहुंचे थे। आज सुबह वह रुहेलखंड विवि में ‘भविष्य का भारत’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। मुरादाबाद के चोटीपुर स्थित वेद विद्यालय से बुलाई गईं 50 बच्चियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इस कार्यक्रम की शुरूआत की थी। कार्यक्रम में शहर और आस-पास से लगभग 1200 से अधिक लोग शामिल हुए थे।

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