खेल डेस्क. भारतीय शटलर साइना नेहवाल राजनीति के कोर्ट में कदम रख दिया। दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। बैंडमिंटन खिलाड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में खेलों को बढ़ावा दिया, मैं उनसे प्रेरित हूं। साइना के साथ उनकी बहन चंद्रांशु ने भी भाजपा की सदस्यता ली। इससे पहले पहलवान बबीता फोगाट और योगेश्वर दत्त भी भाजपा में शामिल हुए थे।

साइना ने कहा, ‘‘खेल शुरू किया तब उसकी कोई वजह नहीं थी। अब भाजपा में शामिल हुई, इसकी भी कोई वजह नहीं है। प्रधानमंत्री दिन-रात मेहनत करते हैं। यह अच्छा लगता है। मैं भी अपने देश का नाम रोशन कर रही हूं।अब पार्टी में शामिल होकर देश के लिए आगे भी बहुत कुछ करना चाहती हूं। यह मेरे लिए गर्व की बात होगी। मेरा मानना है कि भाजपा अपने देश के लिए बहुत कुछ कर रही है। मैं राजनीति के साथ खेल भी जारी रखूंगी।’’

वह राजनीति में अच्छा काम करेगी: साइना की मां

साइना की मां ऊषा रानी ने कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं। साइना ने खेल में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। वह राजनीति में भी अच्छा काम करेगी। भाजपा ने देश के लिए बहुत अच्छा काम किया है। साइना हमेशा कड़ी मेहनत करती रही है और वह इसे राजनीति में भी जारी रखेगी।’’

साइना ओलिंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी
साइना बैडमिंटन के सभी बड़े टूर्नामेंट (ओलिंपिक, वर्ल्ड चैम्पियनशिप और वर्ल्ड जूनियर चैम्पियनशिप) में पदक जीतने वाली इकलौती भारतीय हैं। ओलिंपिक में पदक जीतने वाली वे पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। साइना ने 2014 उबर कप में भारतीय टीम की कप्तानी की थीं। तब भारत कांस्य पदक जीता था। 

वे 2015 वर्ल्ड चैम्पियनशिप में रजत और 2017 में कांस्य जीती थीं। कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके नाम तीन स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक है। उनके नाम एशियन गेम्स में दो कांस्य और एशियन चैम्पियनशिप में तीन कांस्य पदक हैं।

2010 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड
साइना को 2018 में वर्ल्ड बैडमिंटन फेडरेशन ने मोस्ट प्रॉमिसिंग प्लेयर ऑफ द ईयर चुना था। उन्हें 2009 में अर्जुन अवॉर्ड, 2010 में पद्मश्री, 2010 में राजीव गांधी खेल रत्न और 2016 में पद्म भूषण सम्मान दिया गया।

खेल से राजनीति में आए योगेश्वर-बबीता हरियाणा चुनाव में हारे
योगेश्वर और बबीता के अलावा भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह भाजपा के टिकट पर पिछले साल हरियाणा विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरे थे। बबीता और योगेश्वर को हार मिली, लेकिन संदीप सिंह ने जीत दर्ज की थी। उन्हें राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलवाई और फिर खेल मंत्री का पद दिया गया।

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